Sunday, January 27, 2019

नीले पंखों वाली मैं हूँ.......केदारनाथ अग्रवाल

वह चिड़िया जो-
चोंच मार कर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से, रस से खा लेती है
वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्‍न से बहुत प्‍यार है।


वह चिड़िया जो-
कंठ खोल कर
बूढ़े वन-बाबा के खातिर
रस उँडेल कर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्‍यार है।


वह चिड़िया जो-
चोंच मार कर
चढ़ी नदी का दिल टटोल कर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्‍यार है।
-केदारनाथ अग्रवाल

9 comments:

  1. सुन्दर और सरल कविता !

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  2. बहुत ही सुंदर......

    वह चिड़िया जो-
    चोंच मार कर
    दूध-भरे जुंडी के दाने
    रुचि से, रस से खा लेती है
    वह छोटी संतोषी चिड़िया
    नीले पंखों वाली मैं हूँ
    मुझे अन्‍न से बहुत प्‍यार है।
    .....👌👌👌👌

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  3. बहुत सुंदर रचना 👌👌👌👌

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  4. वाह बहुत सुन्दर सरस मनभावन ।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (28-01-2019) को "सिलसिला नहीं होता" (चर्चा अंक-3230) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बहुत सुन्दर

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  7. ओ! नीले पंखो वाली मुझे आप बेहद पसंद हैं...

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