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Wednesday, March 6, 2019

कहने दो मुझे कि प्यार है......स्मृति आदित्य पाण्डेय



मैं फिर कहूंगी, 
मुझे फिर-फिर कहना है 
तुम्हारा प्यार मेरा सौभाग्य है 
तुम कहोगे प्यार है तो है 
सबको बताना क्यों 
और मेरा जवाब होगा 
प्यार है तो है 
सबसे छिपाना क्यों 
तुम फिर कहोगे 
पर सबको क्यों बताना 
मैं फिर कहूंगी 
इसमें क्या छिपाना... 
तुम कहोगे मैं असहज हो जाता हूं 
मैं कहूंगी इस असहज दुनिया में 
बस यही सबसे सहज लफ्ज़ है 
जिसने बचा कर रखी है 
दुनिया की भीगी कोमलता 
दुनिया को बचाने में एक स्नेह बूंद 
मेरी तरफ से भी... कहने दो मुझे कि प्यार है...

- स्मृति आदित्य पाण्डेय

Friday, January 26, 2018

मन कहीं खोना चाहता है............स्मृति आदित्य




खिले थे गुलाबी, नीले,
हरे और जामुनी फूल
हर उस जगह
जहाँ छुआ था तुमने मुझे,



महक उठी थी केसर
जहाँ चूमा था तुमने मुझे,

बही थी मेरे भीतर नशीली बयार
जब मुस्कुराए थे तुम,


और भीगी थी मेरे मन की तमन्ना
जब उठकर चल दिए थे तुम,

मैं यादों के भँवर में उड़ रही हूँ
अकेली, किसी पीपल पत्ते की तरह,
तुम आ रहे हो ना
थामने आज ख्वाबों में,


मेरे दिल का उदास कोना
सोना चाहता है, और
मन कहीं खोना चाहता है
तुम्हारे लिए, तुम्हारे बिना। 


-
स्मृति आदित्य