जो भी देगा, रब देगा
सोच रहा हूं कब देगा
जीते जी मर जाऊं क्या
जन्नत मुझको तब देगा
जिसने दी है ज़ीस्त हमें
जीने का भी ढब देगा
बहुत भरोसा है जिस पर
धोखा मुझको कब देगा
और किसी से मत मांगो
ऊपर वाला सब देगा
होगी रहमत की बारिश
वो गूंगे को लब देगा
कितनी ख़ुशियां दीं उसने
ग़म का तुहफ़ा अब देगा

~देवमणि पांडेय
प्रस्तुतिः नीतू ठाकुर