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Thursday, February 6, 2020

जो चल सको तो चलो ...निदा फ़ाज़ली

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो

- निदा फ़ाज़ली

Thursday, January 10, 2019

रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये...निदा फ़ाज़ली

अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये 

जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहीं
उन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये 

बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं 
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये 

ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में 
और कुछ दिन यूँ ही औरों को सताया जाये 

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें 
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये
-निदा फ़ाज़ली


Friday, November 2, 2018

दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही ....निदा फ़ाज़ली


दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही 
दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही 

चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसव्विर आँखें 
ज़िन्दगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही 

इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी 
रात जंगल में कोई शम्मा जलाने से रही 

फ़ासला चाँद बना देता है हर पत्थर को 
दूर की रौशनी नज़दीक तो आने से रही 

शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की फ़ुरसत 
अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हँसने-हँसाने से रही
-निदा फ़ाज़ली

Wednesday, October 9, 2013

दूर की रौशनी नज़दीक आने से रही............निदा फ़ाज़ली


दिन सलीके से उगा रात ठिकाने से रही
दोस्ती अपनी भी कुछ दिन ज़माने से रही

चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसाविर आँखें
ज़िन्दगी रोज तस्वीर बनाने से रही

इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी
रात जंगल में कोई शमा जलाने से रही

फासला चाँद बना देता है पत्थर को
दूर की रौशनी नज़दीक आने से रही

शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की फुर्सत
अपनी इज्ज़त भी यहाँ हंसने-हंसाने से रही..

-निदा फ़ाज़ली
मशहूर श़ाय़र और नग़मा निगार
जन्मः 12 अक्टूबर, 1938
ग्वालियर, मध्यप्रदेश