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Sunday, July 22, 2018

चंद हाईकू...आभा खरे


मन बगिया 
सुख दुख के पुष्प 
साथ खिलते 

-*-
खिला गुलाब 
कांटों बीच मुस्काता 
जीना सिखाता 

-*-
जीवन रीत 
तप के ही मिलते 
सोने से दिन ..!!!

-*-
आशा की डोरी 
हौंसलों के मनके 
पिरोई जीत 

-*-
बेटी की हँसी 
महके अंगनारा 
फूलों सी खिली 
- आभा खरे
१ जून २०१८



Thursday, August 24, 2017

रात में वर्षा ....सर्वेश्वर दयाल सक्सेना


मेरी साँसों पर मेघ उतरने लगे हैं,
आकाश पलकों पर झुक आया है,
क्षितिज मेरी भुजाओं में टकराता है,
आज रात वर्षा होगी।
कहाँ हो तुम?

मैंने शीशे का एक बहुत बड़ा एक्वेरियम
बादलों के ऊपर आकाश में बनाया है,
जिसमें रंग-बिरंगी असंख्य मछलियाँ डाल दी हैं,
सारा सागर भर दिया है।
आज रात वह एक्वेरियम टूटेगा-
बौछारे की एक-एक बूँद के साथ
रंगीन छलियाँ गिरेंगी।
कहाँ हो तुम?

मैं तुम्हें बूँदों पर उड़ती
धारों पर चढ़ती-उतरती
झकोरों में दौड़ती, हाँफती,
उन असंख्य रंगीन मछलियों को दिखाना चाहता हूँ
जिन्हें मैंने अपने रोम-रोम की पुलक से आकार दिया है।  

-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना


Wednesday, August 23, 2017

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट,,,सर्वेश्वर दयाल सक्सेना



गोली खाकर
एक के मुँह से निकला-
'राम'।

दूसरे के मुँह से निकला-
'माओ'।

लेकिन
तीसरे के मुँह से निकला-
'आलू'।

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट है
कि पहले दो के पेट
भरे हुए थे।
-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना