
मुट्ठी भर दिए
मील भर अँधेरों को
चुनौती देते हैं
शान से हँसते हैं
और अँधेरे
मन मसोस कर रह जाते हैं
-:-
यही तो है
असली ताकत
उजाले की
जब नन्ही सी रेख
चीर देती है सीना अँधेरे का
और अँधेरे देखते रह जाते हैं
-:-
अँधेरों का हठ
तोड़ने की ठान ली जब
उस नन्हे से माटी के दिए ने
हवाएँ अाँधियाँ बन कर खूब चलीं
मगर वो जाँबाज डरा नहीं डटा रहा
और फिर उजाले के जशन में
अँधेरे अँधेरों मे खो गए !!

-मंजू मिश्रा
