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Saturday, January 2, 2021

दर्द सिमट आया आँखों में ..डॉ. अंशु सिंह


दर्द सिमट आया आँखों में
स्नेह-भाव को तन मन तरसे
आज दर्द से भीगीं पलकें
तुहिन बिंदु कण कण बन बरसे
दुःसह वेदना कोण-कोण में
रूप नवल प्रतिबिंब भरे हैं
चूर्ण हो रहे मुकुल प्रतिच्छवि
आशाएँ कण कण बिखरे हैं
सूने मन की राह गुंजरित
कंठ सिसकियाँ ध्वनि चलती हैं
नयनों में जल भरा रह गया
हृदय मध्य ज्वाला जलती है
जल उठते वो जीवन के पल
छा जाते यादों में छलके
नयन उदास हृदय के अंदर
छाले फूट -फूट के झलके
स्नेह भरा वह कोमल बन्धन
छू न सका हलके से उर में
कब तक ये दुर्भाग्य साथ है
कह दूँ किसे कौन से सुर में
कर सर्वस्व समर्पण पग पर
सो जाऊँ उस तरु छाया में
नहीं चाहती कभी जागरण
असह्य विरह की इस माया में
कभी ना समझी ना कुछ अनुभव
असफलता जीवन में जाना
ठोकर जो पग -पग पर लगती
उसको कभी नहीं पहचाना 
- डॉ. अंशु सिंह