अक्स ने आईने का घर छोड़ा
एक सौदा था जिसने सर छोड़ा
भागते मंज़रों ने आंखों में
ज़िस्म को सिर्फ़ आंख भर छोड़ा
हर तरफ़ रोशनी फैल गई
सांप ने जब खंडहर छोड़ा
धूल उड़ती है धूप बैठी है
ओस ने आंसुओं का घर छोड़ा
खिड़कियाँ पीटती है सर शब भर
आखिरी फ़र्द ने भी घर छोड़ा
क्या करोगा निज़ाम रातों में
ज़ख़्म की याद ने अगर छोड़ा
-शीन काफ़ निज़ाम

