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Saturday, August 1, 2020

कि मेरे भगवान हो तुम ...डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

शाम-ए -महफ़िल है- 
मेरे दिल के मेहमान हो तुम।
मेरी चाहत है समंदर! 
फिर क्यों परेशान हो तुम?

सबने मुख मोड़ लिया, 
आँखें हैं नम,व्याकुल मन
दीप आँधी में जला लूँगी  
कि मेरे भगवान हो तुम।


आके मिल जाओ-बादलों से 
गिर रही रिमझिम,
जानेमन, जानेचमन, 
जानेवफ़ा, मेरी जान हो तुम।
       
प्रियतम! दीपों की टोली, 
तुम रंग भी हो रंगोली।
थाल पूजा का हो पावन कि 
मेरे घनश्याम हो तुम।
डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

Wednesday, November 20, 2019

चाँद -सा मुखड़ा ...ज्योति नामदेव

क्या परिभाषा हो सकती है,
चाँद -से मुखड़े की,
वो जो वासना की ओर
धकेलता है
या फिर वो
जो वासना से पार ले जाता है,

विश्व के सारे प्रेमी
सुन्दर तन, सुन्दर सूरत
को कहते है
चाँद- सा मुखड़ा
लेकिन मै सहमत नहीं
इस उपमा से

चाँद-सा मुखड़ा बनने
के लिए त्यागना
पड़ता है अपना सर्वस्व
जीवन -धारा

तब जाकर बनती है, सीता
तब जाकर बनती है, अहल्या
तब जाकर बनती है, तुलसी
तब जाकर बनती है, गीता

नामों में क्या रखा है जनाब
अपनी कस्तूरी को खोजिए
और आप भी बन जाइए
चाँद -सा मुखड़ा
किसी जिंदगी का टुकड़ा
-ज्योति नामदेव