वही पुरानी दास्ताँ ,
सुनी सुनी कहानियाँ,
है आसमाँ बता रहा,
यह जमीं सुना रही ।
वही पुरानी अकड़ से ,
हवा यहाँ गुजर रही,
मेघ भी बरस रहा,
है बिजलियाँ कड़क रही ।
नया नहीं हैं कुछ यहाँ,
उम्मीद भी नहीं बची,
जो सदियों है झेलते,
बस, वही दर्द साथ है ।
-रामबंधु वत्स