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Friday, March 23, 2018

वही दर्द साथ है.....रामबंधु वत्स

वही पुरानी दास्ताँ ,
सुनी सुनी कहानियाँ,
है आसमाँ बता रहा, 
यह जमीं सुना रही ।

वही पुरानी अकड़ से ,
हवा यहाँ गुजर रही,
मेघ भी बरस रहा,
है बिजलियाँ कड़क रही ।

नया नहीं हैं कुछ यहाँ,
उम्मीद भी नहीं बची,
जो सदियों है झेलते,
बस, वही दर्द साथ है ।
-रामबंधु वत्स