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Wednesday, June 3, 2020

इश्क है मेहमान दिल में ....अरुणिमा सक्सेना

वज़्न   2122.   2122.   212
मतला

रस्मे उल्फत है गवारा क्यों नहीं
दर्द है दिल का सहारा क्यों नहीं ।।
लाड़ से उसने निहारा क्यों नहीं
और नज़रों का इशारा क्यों नहीं ।।

इश्क मे ऐसा अजब दस्तूर है
वो किसी का है हमारा क्यों नहीं ।।

प्यार से उसने लगाया जब गले
आपने देखा नज़ारा क्यों नहीं ।।

आंख नम है गर्म सांसे किसलिए
दर्द का दिल में शरारा क्यों नहीं ।।

इश्क है मेहमान दिल में आज भी
प्यार कम है पर ज़ियादा क्यों नहीं ।।

जा रहा था राह से मेरी मगर
प्यार से उसने पुकारा क्यों नहीं।।

-अरुणिमा सक्सेना
28. 05. 20

Sunday, May 31, 2020

इश्क है मेहमान दिल में ...अरुणिमा सक्सेना

वज़्न   2122.   2122.   212
मतला

रस्मे उल्फत है गवारा क्यों नहीं
दर्द है दिल का सहारा क्यों नहीं ।।

लाड़ से उसने निहारा क्यों नहीं
और नज़रों का इशारा क्यों नहीं ।।

इश्क मे ऐसा अजब दस्तूर है
वो किसी का है हमारा क्यों नहीं ।।

प्यार से उसने लगाया जब गले
आपने देखा नज़ारा क्यों नहीं .।।

आंख नम है गर्म सांसे किसलिए
दर्द का दिल में शरारा क्यों नहीं ।।

इश्क है मेहमान दिल में आज भी
प्यार कम है पर ज़ियादा क्यों नहीं ।।

जा रहा था राह से मेरी मगर
प्यार से उसने पुकारा क्यों नहीं।।

-अरुणिमा सक्सेना
28. 05. 20

Sunday, February 23, 2020

बात कह दे खामोशियां शायद ....अरुणिमा सक्सेना

प्रतिभा मंच 
फिलबदीह 1018
मापनी ...
2122..1212..22

वस्ल की रात आज आई है
बज उठीं है ये चूड़ियां शायद..।।

आग दिल में लगी बुझे कैसे
उठ रहा इस लिये धुआं शायद।।

उनके आने से बहार भी आई
खूब मचले ये शोखियाँ शायद।।

मतला...
बढ़ रही है ये दूरियाँ शायद
काम आतीं मजबूरियों शायद।।

दिल की बातें नज़र से कहती हैं
बात कह दे खामोशियां शायद।।
- अरुणिमा सक्सेना