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Thursday, January 16, 2020

माँ इतनी खाश क्यों है ?



बारिश में मै जब घर वापस आयी....
भाई ने पूछा, "छाता लेकर क्यों नहीं गयी थे?
दीदी ने सलाह दी, "बारिश रुकने का इन्तजार करती"
पापा ने गुस्से में बोला, "जब ठण्ड लग जाएगी तब मालुम पड़ेगा"
लेकिन
मेरी माँ मेरे बाल सुखाती हुई बोली, 

"ये बारिश भी न, थोडा देर रुक नहीं सकती थी 
जब मेरी बेटी घर आ रही थी |

ब्लॉग - Love You Mom


Friday, December 13, 2019

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ :)

बेसन की सोंधी रोटी पर
खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है चौका बासन
चिमटा फुकनी जैसी माँ



बान की खुर्री खाट के ऊपर

हर आहट पर कान धरे
आधी सोयी आधी जागी
थकी दुपहरी जैसी माँ



चिडियों की चहकार में गूंजे

राधा-मोहन अली-अली
मुर्गे की आवाज से खुलती
घर की कुण्डी जैसी माँ



बीबी बेटी बहन पडोसन

थोडी थोडी सी सब में
दिनभर एक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी जैसी माँ



बाँट के अपना चेहरा माथा

आँखे जाने कहाँ गयीं
फटे पुराने एक एल्बम में
चंचल लड़की जैसी माँ 


Wednesday, December 11, 2019

घर में माँ की कोई तस्वीर नही :(



घर में माँ की कोई तस्वीर नही
जब भी तस्वीर खिचवाने का मौका आता है
माँ घर में खोई हुई किसी चीज को ढूंढ रही होती है
या लकड़ी घास और पानी लेने गई होती है
जंगल में उसे एक बार बाघ भी मिला
पर वह डरी नही
उसने बाघ को भगाया घास काटी घर आकर
आग जलाई और सबके लिए खाना पकाया

मई कभी घास या लकड़ी लाने जंगल नही गया

कभी आग नही जलाई
मई अक्सर एक जमाने से चली आ रही
पुरानी नक्काशीदार कुर्सी पर बैठा रहा
जिस पर बैठ कर तस्वीरे खिचवाई जाती है
माँ के चेहरे पर मुझे दिखाई देती है
एक जंगल की तस्वीर लकड़ी घास और
पानी की तस्वीर खोई हुई एक चीज की तस्वीर !!

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