
तमाम फतवे कहाँ मुफ्तियों के होते है
कुछ एक फैसले मजबूरियों के होते है
बुजुर्ग जिनके उठाते नही किसी पे नज़र
दुपट्टे सर पे उन्ही बच्चियों के होते है
जो आँधियों में भी रूकती नहीं है रोके से
गुलाब सिर्फ उन्ही तितलियों के होते है
वो सब्ज़ रंग का स्वेटर वो सुर्ख सेब से गाल
कई मज़े भी मियां सर्दियों के होते है
तअल्लुकात में बरसो के पड़ गई है दरार
यही नतीजे गलतफहमियों के होते है
ज़मीन बांटना अच्छा नहीं मिरे भाई
खसारे इसमें कई पीढ़ियों के होते है
ये कारोबार तो मीरासियो के होते है
"तुफ़ैल' आयेंगे इतने कहाँ से राजकुमार
कि ऐसे ख्वाब सभी लड़कियों के होते है
-तुफैल चतुर्वेदी