चांद तारों का वो हमराज़ नहीं हो सकता,
ख़ुद से माइल-ए-परवाज़ नहीं हो सकता
मेरे जैसा तेरा अंदाज नहीं हो सकता
इक कबूतर कभी शाहबाज़ नहीं हो सकता
अज़्म फ़रहाद जो रखता नहीं अपने दिल में
वो ज़ुनु-ख़ेजी में मुमताज़ नहीं हो सकता
तू ही रखता है हर राज़ मेरा पोशीदा,
तेरे जैसा कोई हमराज़ नहीं हो सकता.
मुझको जो कुछ भी मिला ये है इनायत तेरी,
अपनी कोशिश पे मुझे नाज़ नही हो सकता.
सर को अपने जो हथेली पे रख ले अफ़ज़ल,
मेरी नज़रों में वो जांबाज़ नहीं हो सकता.
-अफ़ज़ल अलाहाबादी

