Showing posts with label शुभा मेहता. Show all posts
Showing posts with label शुभा मेहता. Show all posts

Saturday, March 21, 2020

बीमार सा लगता है मेरा शहर....शुभा मेहता

आज बीमार सा लगता है 
मेरा ये शहर 
कभी गुलजा़र हुआ करता था 
हर तरफ हुआ करती थी 
ताजा हवा ...
जिसके झोंके से 
मिलता था सुकून .
पेड़ों की शाखों पर 
गाते थे पक्षी ..
आज देखो तो 
बस धुआँ ही धुआँ 
खाँसते लोग ...
प्रदूषण के मारे 
बेहाल ......!!
      
लेखिका - शुभा मेहता 

Sunday, September 15, 2019

पता है न....शुभा मेहता

पता है न ...
एक दिन तुम भी
टँग जाओगे
तस्वीर में
घर के किसी
कोने में
किसी खूँटी पर 
इसीलिए...
प्रेम बीज बोओ
उन्हें प्रेम से पालो
सींचो प्रेम से
प्रेम फल पाओगे
क्या धरा है
झगड़े -लड़ाई में
प्रेम बोओगे
सबके दिलों  मेंं
रह जाओगे ।
      
लेखिका - शुभा मेहता

Monday, July 15, 2019

तपती दुपहरी......शुभा मेहता

जेठ की इस 
तपती दुपहरी में
हाल -बेहाल
पसीने से लथपथ 
जब काम खत्म कर 
वो निकली बाहर 
घर जाने को 
बडी़ गरमी थी 
प्यास से गला 
सूखा.......
घर पहुँचने की जल्दी थी 
वहाँ बच्चे कर रहे थे 
इंतजार उसका 
सोचा ,चलो रिक्षा कर लूँ
फिर अचानक बच्चों की 
आवाज कान में गूँजी..
"माँ ,आज लौटते में 
तरबूज ले आना 
गरमी बहुत है 
मजे से खाएंगे"
और उसके कदम 
बढ़ उठे उधर 
जहाँ बैठे थे 
तरबूज वाले
सोचा ,बच्चे कितने खुश होगें 
मैं तो पैदल ही 
पहुंच जाऊँगी ...
पसीना पोंछ 
मुस्कुराई ...
तरबूज ले 
चल दी घर की ओर ......माँँ जो थी

लेखक परिचय - शुभा मेहता