Showing posts with label रजनी मोरवाल.सावन. Show all posts
Showing posts with label रजनी मोरवाल.सावन. Show all posts

Tuesday, July 26, 2016

सावन बहका है...........रजनी मोरवाल


लो, सावन बहका है 
बूँदों पर है खुमार, मनुवा भी बहका है। 

बागों में मेले हैं
फूलों के ठेले हैं,
झूलों के मौसम में
साथी अलबेले हैं।

कलियों पर है उभार, भँवरा भी चहका है।

ऋतुएँ जो झाँक रहीं 
मौसम को आँक रहीं,
धरती की चूनर पर
गोटे को टांक रहीं।

उपवन पर हो सवार, अंबुआ भी लहका है।

कोयलिया टेर रही
बदली को हेर रही,
विरहन की आँखों को 
आशाएँ घेर रही। 

यौवन पर है निखार, तन-मन भी दहका है।
रजनी मोरवाल
rajani_morwal@yahoo.com