Showing posts with label प्रगति मिश्रा 'सधु'. Show all posts
Showing posts with label प्रगति मिश्रा 'सधु'. Show all posts

Wednesday, October 14, 2020

तुम मूकदर्शक,मैं कामिनी ..प्रगति मिश्रा 'सधु'


तुम मूकदर्शक,मैं कामिनी
हृदय  उद्वेलक, हूँ दामिनी
तुम उज्जवल छटा,मैं कांति
दिव्यर्शन से ही आती शांति
न हिय ने पाई यह भ्रान्ति ।
तुम प्रेम हो, मैं रागिनी
तेरे सुर की हूँ मैं वादिनी।
तुम शीश हो,मैं हृदयस्थल
हृदय तार कंपित
क्षण-क्षण, पल-पल।
जीवन में ऐसे आए हो 
मानो...सोमरस से, छाए हो।
तुम चलते हो यूँ डेंग-डेंग
पग-पग तो मेरे छोटे हैं
वह क्षण जीवन में आते
जो वृन्दावनवासी  खोते हैं।
तुम निद्रा हो,मैं स्वप्न निराली
है निज सुगन्ध खुद पे भारी
यूँ कल-कल करती आयी हूँ
जीवन में तेरे छाई हूँ.... ।।

।।सधु।।

 

Monday, September 28, 2020

पर खबरदार!!! अनर्थ को ललकारने से बचना ...प्रगति मिश्रा 'सधु'

अनर्थ को ललकारने से बचना

हूँ सहनशील पर इतना नहीं कि,

राह के पाषाण की तरह

कोई ठोकर मार दे...और

ढलमलाते एक कोने से

दूसरे कोने में जा गिरे...।


है धैर्य बेहद मूल्यों का

पर इतना नहीं कि;

समक्षी अपनी नैतिकता गटक जाए

और ताकते मुंह रह जाएं

चिर -चिरंतर तक।


है प्रवृति खुशमिजाज-सहृदय  सी पर,

इतना नहीं कि;

धृष्टों की धृष्टता पर , हंसी जाए।

मित्रवत व्यवहार किया जाए ।

दोमुहें सांपो के भीड़ में खड़ी,

लिए कटोरा दूध का

पर खबरदार!!!


अनर्थ को ललकारने से बचना।

हूँ नम्र पर इतना नहीं कि

नरम समझकर

खीरे- ककरी की तरह चबा जाओ

..........................................

पैर के नीचे से ज़मीन खीचनें की 
औकात हम रखते हैं

-प्रगति मिश्रा 'सधु' 

Tuesday, June 27, 2017

"अनंत का अंत"......प्रगति मिश्रा 'सधु'









शब्द अथाह है, अपार है, अनंत है l
पर...उस "अनंत का अंत" शब्द मेरा है l
हर शब्द में एक कशिश ~~~~
एक नया उन्माद होता है
शब्द प्रेम है, शब्द अनुभव है 
शब्द तुममें है, शब्द मुझमें है 
शब्द है भाव की काया
शब्द है आँखों की माया
शब्द वाचाल है 
पर ....अनर्गल नहीं 
शब्द सार्थक है, निरर्थक नहीं 
किंतु मेरा शब्द अनन्य है .....
वह मूक है, मौन है 
निस्तेज है, सांकेतिक है वह l
उद्दीपन, आलंबन, स्थाईभावों को 
खुद में समेटे ...आंगिक - रसमयी है 
हाँ !!!! मेरा वह आलौकिक शब्द "नि:शब्द" है l
क्योंकि भाव शब्द का मोहताज नहीं ~~~l












-प्रगति मिश्रा 'सधु'