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Wednesday, July 31, 2019

ग्लेशियर... पूजा प्रियम्वदा

एक डाह है रूह में 
जैसे तेरी उपेक्षा का 
जलता कोयला 
छू गया हो

जले हुए घाव सुना 
सालों तक उतारते हैं 
एक काले लम्हे की पपड़ी 
और निशान 
रह जाता है फिर भी

इस जिस्म के 
सुप्त ज्वालामुखी में 
मेरी रूह का ग्लेशियर 
पिघलने लगा है

बूंदों के वाष्प बनने से 
पहले न लौटो तो 
लावे के नमक में 
चख लेना मुझे !
-पूजा प्रियम्वदा


Sunday, July 14, 2019

वो .... पूजा प्रियम्वदा

सड़क के बीचों बीच 
भूल गयी अपना पता 
नाम, शख्सियत

गर्म तवा छू लिया 
सोचके कि 
ठंडी सुराही रखते थे 
पहले वहाँ 
चाय में नमक है 
सब्ज़ी में दूध उड़ेलते ही 
हवा को घुटन होने लगती है

आँसू हैं या पसीना 
कोई चखे तो जाने 
चेहरा भीग गया है 
उमस की अँधेरी रात 
आँखों में उतरती

किसी चौराहे पर 
निर्वस्त्र खड़ी है 
फ़व्वारे थक गए हैं 
वो अपना नाम भूल गयी है

- पूजा प्रियम्वदा

Saturday, April 13, 2019

एक औरत .....पूजा प्रियम्वदा

तुम्हारे बच्चों की माँ को
उनके साथ सोता छोड़कर
एक औरत दुनिया में लौटती है
हँसती है
जितना वो चाहें
जब वो चाहें और
पहनती है जो वो चाहें
उतारती है जब वो चाहें
जिस्म से बहुत गहरे कहीं
खुद को अजनबियों के नीचे
एक सामूहिक कब्र में दफन कर
लौट आती है
धोती है गर्म पानी से हाथ
तुम्हारी बेटी के चेहरे को सहलाती है
तुम्हारे बेटे का माथा चूमती है
फिर से सिर्फ उनकी माँ बन जाती है