आप कहते हैं दूषित है वातावरण,
पहले देखें स्वयं अपना अंतःकरण।
कितना संदिग्ध है आपका आचरण,
रात इसकी शरण,प्रातः उसकी शरण।
आप सोते हैं सत्ता की मदिरा लिये,
चाहते हैं कि होता रहे जागरण।
फूल भी हैं यहां, शूल भी हैं यहां,
देखना है कहां पर धरोगे चरण।
आप सूरज को मुट्ठी में दाबे हुये,
कर रहे हैं उजालों का पंजीकरण।
शब्द हमको मिले, अर्थ वो ले गये,
न इधर व्याकरण,न उधर व्याकरण।
लीक पर हम भी चलते मगर 'क़म्बरी',
कौन है ऐसा जिसका करें अनुसरण।

- अंसार क़म्बरी
