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Wednesday, September 27, 2017

हाले दिल पहाड़ो के..... प्रकाश


जब तनहाई में मुझको 
तेरी याद सताती है,  
तेरे ख्याल आते हैं.....
ये पहाड़ भावुकता से मुझे 
अपना हाले दिल सुनाते हैं....

कहते मुझसे -
हम भी खड़े सदियों से 
किसी के इन्तजार में 
हम भी डूबे थे 
कभी किसी के प्यार में 
हमारा प्यार अपने आप में 
एक राज भी है 
इसलिए उसकी वफा पर यकीं 
हमें आज भी है 

फिर तू क्यों इतना बेचैन हो रहा 
चंद दिनों में अपना चैन खो रहा 
तू भी मजा ले हमारी तरह 
अपने इन्तजार का 
आज परीक्षा है पगले 
तेरे सच्चे प्यार का 

मैंनें सोचा - ये पहाड़ 
भले पत्थर के होते हैं 
इनके सीने में भी दफन 
कई जज़्बात होते हैं 
दिल भी हमारी तरह 
धड़कता इनके सीने में 
ये जहां में सबसे माहिर 
अपना दर्द पीने में 
नहीं शिकायत तनहाई से 
जब अकेले होते हैं 
अपना दर्द छुपा-छुपा कर 
चुपचाप पिघल कर रोते हैं 

और मैं 
प्यार की परिभाषा में 
कितना पीछे छूट रहा हूँ 
कुछ दिनों की तनहाई में 
इतनी जल्दी टूट रहा हूँ.....

-प्रकाश.... 
पेंगॉन, लेह
28.06.17