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Sunday, February 11, 2018

जाने क्यूँ !!!...................सदा


शब्दों की चहलकदमी से
आहटें आती रहीं
सन्नाटे को चीरता
एक शोर
कह जाता कितना कुछ
मौन ही !
बिल्कुल वैसे ही
मेरी खामोशियाँ आज भी
तुमसे बाते करती हैं
पर ज़बां ने खा रखा है
चुप्पी का नमक
कुछ भी कहने से
इंकार है इसे
जाने क्यूँ !!! 

-सीमा सदा सिंघल
......फेसबुक से

Monday, February 15, 2016

टूटना शुभ होता है कांच का .... सदा


हर सवाल का जवाब ढूंढना या देना जाने क्यों, 
कभी-कभी ऐन वक्त पर मुश्किल हो जाता है ।

गिरकर उठना फिर संभल जाना संभव होता है, 
नजरों में गिरकर उठ पाना मुश्किल हो जाता है ।

लड़ लेता है इंसान हर लड़ाई गैरों से हर तरह, 
अपनों से लड़कर जीतना मुश्किल हो जाता है ।

टूटना शुभ होता है कांच का कहते हैं बला टली, 
टुकड़ा चुभ जाए कोई जब मुश्किल हो जाता है ।

कोई हमसफर हो साथ तो रास्ता कट जाता है, 
जाने कब, तन्हा सफर 'सदा' मुश्किल हो जाता है ।

शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

Wednesday, December 16, 2015

याद आया तो ज़रूर होगा !! ..............सदा













कभी प्रेम  
कभी रिश्ता कोई  
बन गया हमनवां जब  
तुमने जिंदगी को  
हँस के गले  
लगाया तो ज़रूर होगा ! 
... 
मांगने पर भी 
जो मिल न पाया 
ऐसा कुछ छूटा हुआ 
बिछड़ा हुआ 
कभी न कभी 
याद आया 
तो ज़रूर होगा !! 
... 
कोई शब्द जब कभी 
अपनेपन की स्याही लिए 
तेरा नाम लिखता 
हथेली पे 
तुमने चुराकर नज़रें 
वो नाम 
पुकारा तो ज़रूर होगा!!! 
...
सीमा सदा
http://sadalikhna.blogspot.in/2015/07/blog-post.html

Sunday, June 28, 2015

मील के पत्थर नहीं होते......सदा










कुछ टूटता है जब भी,

मन अनमना हो

टूटू-फूटे सवाल करता है,

सपनों को वो 

उम्मीद की आँखों में 

पलने नहीं देता 

मुश्किल रास्तों पर

देखना अक़्सर 

मील के पत्थर नहीं होते


... 


एक चिन्ह पहचान का 

घने ज़ंगलों में 

खो जाता है 

अपनी ही आवाज़ 

लौट के आती है बार-बार

कहाँ जाना है, क्या पाना है 

मुसाफि़र एक दिशा तय कर

धैर्य की लाठी ले

मन को हांक लगाता चल 

मुश्किलें आएंगी 

पर तू बढ़ता चल 

-सदा