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Monday, October 8, 2018

शहर में जश्न हे, नैजो पे चढे है बच्चे ......मुजफ्फर हनफ़ी

दोस्तों नजरे फसादात नही होने की 
जान दे कर भी मुझे मात नहीं होने की 

उन से बिछड़े तो लगा जैसे सभी अपनो से
आज के बाद मुलाकात नहीं होने की

ये कड़े कोस मसाफत के बरस दिन तक है 
ओर दोराने सफर रात नही होने की 

बीच के लोग नकरीन बने रहते हैं 
दू बदू उन से मेरी बात नही होने की 

देखो मिट्टी को लहु से ना करो आलूदाह 
वर्ना इस साल भी बरसात नही होने की 

शहर में जश्न हे, नैजो पे चढे है बच्चे 
आज मकतब मे मुनाजात नही होने की 

मेरे मजहब ने सिखाया है मुजफ्फर मुझको 
जंग की मुझ से शुरूआत नही होने की 
- मुजफ्फर हनफ़ी