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Friday, September 7, 2018

तुम बदल गए.......आरती चित्तौडा

तुम बदल गए।
थामकर हाथ तुम्हारा,
चल पड़ी थी सपनों में रंग भर के
उम्मीद के पंख लगाकर,
सखा भाव से...
तुम बदल गए।

नहीं बात करते मेरे सपनों की,
महत्वाकांक्षाओं की,
ना ही किताबों की..
अब बात होती है,
मात्र व्हाट्सएप के मैसेज,
और फेसबुक के वीडियो की..
तुम बदल गए।

चेहरा देखकर नहीं जान पाते हो,
मन की बात,
भूल से गए हो,
रूठने, मनाने की बात...
तुम बदल गए।
कुछ टूट रहा है,
बहुत कुछ छूट रहा है...
रिश्तों में अनकही सी दूरी है,
डोर संवादों की,
कहीं तो अधूरी है..
तुम बदल गए...
तुम बदल गए...।
-आरती चित्तौड़ा

Monday, February 13, 2017

फागुन.... संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'



पहाड़ों पर टेसू ने रंग बिखेरे फागुन में 
हर कदम पर बज रहे ढोल फागुन में
ढोल की थाप पे थिरकते पैर फागुन में
महुआ लगे झुमने गीत सुनाए फागुन में  

बिन पानी खिल जाते टेसू फागुन में 
पानी संग मिल रंग लाते टेसू फागुन में 
रंगों के खेल हो जाते शुरू फागुन में 
दुश्मनी छोड़ दोस्ती के मेल होते फागुन में  

शरमाते जाते हैं सब मौसम फागुन में 
मांग ले जाते प्रेमी कुछ प्यार फागुन में 
हर चहरे पर आ जाती खुशहाली फागुन में 
भगोरिया के नृत्य लुभा जाते फागुन में  

बांसुरी, घुंघरू के संग गीत सुनती फागुन में 
ताड़ों के पेड़ों से बन जाते रिश्ते फागुन में 
शकर के हर-कंगन बन जाते मेहमां फागुन में 
पहाड़ों की सचाई हमसे होती रूबरू फागुन में  

-संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'

Monday, December 12, 2016

सफल वक्त........... अनूप तिवारी


ऐ मेरे वक्त तू बहुत याद आता है
तेरी ठोकरों पर भी प्यार आता है

तुझसे जो पाया मैंने, 
वो भुलाया नहीं जाता

सफलता के उस एहसास को, 
दिल से निकाला नहीं जाता 

तुझसे ही मिले रंग बदलते लोग जमाने के 
तुझसे ही मिले जिंदादिल यार हर मिजाज के

तुझसे ही ज्ञान मिला गुरुओं का 
तुझसे ही साथ मिला अपनों का  

तुझसे ही दौलत-शोहरत पहचान मिली
ऐ मेरे वक्त तू बहुत याद आता है।

- अनूप तिवारी