Showing posts with label रईस अमरोहवीं. Show all posts
Showing posts with label रईस अमरोहवीं. Show all posts

Wednesday, May 23, 2018

मुझे बचपन की कुछ यादें.....रईस अमरोहवीं



तिरा ख़याल कि ख़वाबों में जिन से है ख़ुशबू 
वो ख़्वाब जिन में मिरा पैकर-ए-ख़याल है तू। 

सता रही हैं मुझे बचपन की कुछ यादें
वो गर्मियों के शब़-ओ-रोज़ दोपहर की वो लू। 

पचास साल की यादों के नक़्श और नक़्शे 
वो कोई निस्फ़ सदी क़ब्ल का ज़माना-ए-हू। 

वो गर्म-ओ-ख़ुश्क महीने वो जेठ वो बैसाख.
कि हाफ़िज़ में कभी आह कैं कभी आँसूं।
-रईस अमरोहवीं
मोहतरिम श़ायर रईस साहब की पूरी ग़ज़ल
पढ़वाना चाहते थे हम..
पर टाईप करने में असफल रहे
पूरी ग़ज़ल यहाँ पढ़ें
रोमन हिन्दी में है..