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Tuesday, May 21, 2019

हाइकु..... डॉ.यासमीन ख़ान

मौन वेदना
हँसते हुए मुख
 नम हैं नैना
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कर्म है सिंधु
दूर अभी साहिल
नियति बिंदु।
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मन हिलोर
सजे याद की बज़्म
प्रेम ही ठौर।
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दिल को भाये
सदा से ही सागर
नैना रिझाये।
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महके यास्मीं 
जूही,चंपा,कली सी
सजी सी ज़मीं।
डॉ.यासमीन ख़ान 
02-05-2019

Tuesday, April 30, 2019

चंद हाइकु...डॉ.यासमीन ख़ान

पिया के रंग
रंगी मोरी चूनर
नैनो में वर।

झुके है सर
अब चल अम्बर
पिया के घर।

खूब सँवर
तकेगा दिलबर
एक नज़र।

अब सुधर
सकल भूलकर
रब ही वर।

भव सागर
भौतिकता नाचे है
चढ़ के सर।

भटके नर
मोह में फंसकर
हे! परवर।

है जर-जर
तन,मन पंजर
संताप हर।

कृपानिधान
एक तू ही महान
कृपा तू कर।

डॉ.यासमीन ख़ान 
27-04-2019