मौन वेदना
हँसते हुए मुख
नम हैं नैना
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कर्म है सिंधु
दूर अभी साहिल
नियति बिंदु।
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मन हिलोर
सजे याद की बज़्म
प्रेम ही ठौर।
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दिल को भाये
सदा से ही सागर
नैना रिझाये।
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महके यास्मीं
जूही,चंपा,कली सी
सजी सी ज़मीं।
डॉ.यासमीन ख़ान
02-05-2019
पिया के रंग
रंगी मोरी चूनर
नैनो में वर।
झुके है सर
अब चल अम्बर
पिया के घर।
खूब सँवर
तकेगा दिलबर
एक नज़र।
अब सुधर
सकल भूलकर
रब ही वर।
भव सागर
भौतिकता नाचे है
चढ़ के सर।
भटके नर
मोह में फंसकर
हे! परवर।
है जर-जर
तन,मन पंजर
संताप हर।
कृपानिधान
एक तू ही महान
कृपा तू कर।
डॉ.यासमीन ख़ान
27-04-2019