Showing posts with label धीरज शर्मा. Show all posts
Showing posts with label धीरज शर्मा. Show all posts

Friday, April 27, 2018

बालों पे चांदी सी चढ़ी थी.....धीरज शर्मा

ज़िन्दगी से लम्हें चुरा
पर्स में रखती रही!

फुरसत से खरचूंगी
बस यही सोचती रही।

उधड़ती रही जेब
करती रही तुरपाई
फिसलती रही खुशियाँ
करती रही भरपाई।

इक दिन फुरसत पायी
सोचा .......
खुद को आज रिझाऊं
बरसों से जो जोड़े
वो लम्हें खर्च आऊं।

खोला पर्स..लम्हें न थे
जाने कहाँ रीत गए!

मैंने तो खर्चे नही
जाने कैसे बीत गए !!

फुरसत मिली थी सोचा
खुद से ही मिल आऊं।

आईने में देखा जो
पहचान ही न पाऊँ।

ध्यान से देखा बालों पे
चांदी सी चढ़ी थी,
थी तो मुझ जैसी
जाने कौन खड़ी थी।
- धीरज शर्मा