Showing posts with label दिलबागसिंह विर्क. Show all posts
Showing posts with label दिलबागसिंह विर्क. Show all posts

Thursday, January 30, 2020

दूर तक नज़र नहीं आता किनारा...दिलबागसिंह विर्क

कुछ इस क़द्र गर्दिश में है मेरा सितारा 
कहीं दूर तक नज़र नहीं आता किनारा। 

उन्हें गवारा नहीं मेरी हाज़िरजवाबी 

मुझे ख़ामोश रहना, नहीं है गवारा।

अपने हुनर की दाद पाना चाहता होगा 

तभी ख़ुदा ने चाँद को ज़मीं पर उतारा। 

बस अपनी मुलाक़ात हो नहीं पाती वरना 

गैरों से रोज़ पूछता हूँ, मैं हाल तुम्हारा। 

बीच रास्ते में कहीं साथ छोड़ देता है ये 

क़दमों के साथ घर न आए, दिल आवारा। 


फ़र्ज़ानों की नज़र में तो दीवाना ही हूँ मैं 

कौन पागल है ‘विर्क’, जिसने मुझे पुकारा।  

लेखक परिचय- दिलबागसिंह विर्क 

Tuesday, December 10, 2019

रिश्तों पर बर्फ....... दिलबागसिंह विर्क


अहम् की पट्टी 
स्वार्थ के फाहे रखकर 
जब बाँध लेते हैं हम 
सोच की आँखों पर 
तब जम जाती है 
रिश्तों पर बर्फ 
दम घुट जाता है रिश्तों का 

दिल में गर्माहट रखकर 

बढाते हैं जब हाथ 
मिट जाती हैं सब दूरियां 
पिघल जाती है बर्फ 
जीवित हो उठते हैं रिश्ते 
प्यार की संजीविनी पाकर 

रिश्तों पर बर्फ 

जमने और पिघलने का 
कोई मौसम नहीं होता 
अविश्वास, अहम्, स्वार्थ  
जमा देते हैं बर्फ 
विश्वास, वफा, प्यार 
पिघला देते हैं इसे !!

लेखक परिचय - दिलबागसिंह विर्क