
पहली बार जब उसे छुआ,
लगा..ओस में भींगे गुलाब को छुआ..!
उसकी चमकती आँखों ने हर बार
मेरी आँखों में पालते सपनों को छुआ।
दुःख की तेज़ हवाओं में उसने
हर बार हौले से मेरे कंधे को छुआ,
उसकी हर छुअन ने हर बार
मेरी उड़ान और हौसले को छुआ।
उलझी-उलझी उलझनों में सदा
उसकी सही सोच ने मेरी समझ को छुआ।
उसके दिल ने हर बार
मेरे दिल की धड़कनों को छुआ।
इसीलिए मैं अब तक ज़िंदा हूँ
क्योंकि...वो मेरी बेटी है...और
मैं उसकी माँ हूँ।
-रश्मि भटनागर