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Friday, June 5, 2020

आस्तीन के सांप से दुनियादारी भरी ..सुखविन्दर सिंह मनसीरत

चलते चलते यूँ ही रूक जाता हूँ मैं
कहना चाहूँ जो पर न कह पाता हूँ मैं

उल्फतों का समंदर है हिलोरे खा रहा
भावनाएँ व्यक्त ना कर पाता हूँ मैं

दोस्त दुश्मन बने जिन्दगी की राह पर
अपने पराये न खोज कर पाता हूँ मैं

हार मान लूँ जो यहाँ ये मुनासिब नहीं
पर स्वयं से ही नहीं जीत पाता हूँ मैं

तोड़ दूँ असूलों को यहाँ गवारा नहीं
कायदों पे कभी नहीं टिक पाता हूँ मैं

जो भी मिला राहों में वो दगा दे गया
डंक जहरीलों से नहीं कर पाता हूँ मैं

आस्तीन के सांप से दुनियादारी भरी
राह काट कर भी नहीं चल पाता हूँ मैं

मतलबी दुनिया में कोई भी मीत नहीं
प्रीत की रीत को ना निभा पाता हूँ मैं

सुखविन्द्र ने प्यार में ठोकरें ही खाई
प्रेमपथ पे रसिक नहीं बन पाता हूँ मैं

-सुखविन्दर सिंह मनसीरत

Saturday, July 29, 2017

पंखुड़ियाँ ...24 कहानियो का संग्रह

आम के आम..गुठलियों के दाम
कहानी लेखकों के लिए सुनहरा मौका..

आई ब्लॉगर का संचालन करने वाली फर्म प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित होने जा रही 


में आमंत्रित है मात्र 2000 से 3000 शब्दों की मौलिक  अप्रकाशित कहानी

उपरोक्त कहानी संग्रह की बिक्री लाभ (आयका 75 प्रतिशत भाग के 24 लेखक बराबर के भागीदार रहेंगे अथवा प्रति -बुककी बिक्री की आय का 75 प्रतिशत भाग 24 लेखकों को देय होगा।

विस्तार से पढ़िए....

यदि आप कहानियां भी लिखते है तो आप प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा जल्द ही प्रकाशित होने वाली -बुक "पंखुड़ियाँ" (24 लेखक और 24 कहानियाँके लिए आमंत्रितकी जा रही हैं। कहानी -मेल prachidigital5@gmail.com पर 31 अगस्ततक भेजी जा सकती हैं। तो देर किस बात की उठाईये कलम और भेज दीजिए अपनी कहानी। अधिक जानकारी केलिए https://goo.gl/ZnmRkM पर विजिट करें।
अन्य किसी समाधान के लिए prachidigital5@gmail.com पर संपर्क करें या 9760417980 पर Whatsapp करें।