उड़ान जान ले बड़ी कठिन है
कोई तेरे साथ नही है
इन राहों में धूप गरम है
दूर तक कोई छांव नही है
सहारे की भी उम्मीद ना रखना
निज हौसलों पर तू उड़ना
अपनी राह तुम स्वयं बनाना
अपने आप को पाना हो जो
बनी राह पर ना तू चलना
कितनी भी कठिनाई हो
बस तू हरदम आगे बढ़ना
तेरी राहें स्वयं बनेगी
दरिया ,बाधा सब निपटेंगी
तूं अपना नूर जगाये रखना
रोक ना पाये कोई तुझ को
यह निश्चय बस ठान के चलना
उड़ान जान ले......
कुसुम कोठारी
(चित्र सौजन्य गूगल)




