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Monday, March 19, 2018

उड़ान....उर्मिल

मोह माया  का  बना हिंडोला ,
अहंकार की  चमक रही डोरी !
लालसा  का  बिछा  है पाटा,
मन  का परिंदा पर फैलाया,
चाह  जगी अम्बर छूने की...!!

ऊँची ऊंची पींगे भरता ,
स्वप्नजाल में उलझा रहता!
हिचकोले खाता ऊपर नीचे ,
तृष्णा की भूख मिटा नही पाता!
समय चक्र चलता रहता ,
इन्सान इसी में भुला रहता!

इस भूलभुलैया की नगरी में,
बीत गई जिन्दगानी सारी!
जब अन्त समय आया,
आगाध तिमिर ने घेरा!
विस्मृत हुवा हिंडोला सुख,
प्रभु को देने लगा दुहाई!!

#उर्मिल