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Tuesday, March 13, 2018

जो भी देगा, रब देगा ....देवमणि पांडेय


जो भी देगा, रब देगा 
सोच रहा हूं कब देगा 

जीते जी मर जाऊं क्या 
जन्नत मुझको तब देगा 

जिसने दी है ज़ीस्त हमें 
जीने का भी ढब देगा 

बहुत भरोसा है जिस पर 
धोखा मुझको कब देगा 

और किसी से मत मांगो 
ऊपर वाला सब देगा 

होगी रहमत की बारिश 
वो गूंगे को लब देगा

कितनी ख़ुशियां दीं उसने 
ग़म का तुहफ़ा अब देगा 
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~देवमणि पांडेय 
प्रस्तुतिः नीतू ठाकुर

Monday, January 15, 2018

दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा​...प्रस्तुतिः नीतू ठाकुर

दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा​
​मैं बैचैन था रात भर लिखता रहा !!​

​छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान की​
​मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा !!​

​दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता​
​मैं था नाज़ुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा !!​

​बदले यहाँ लोगों ने, रंग अपने-अपने ढंग से​
​रंग मेरा भी निखरा पर, मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा !!​

​जिनको जल्दी थी, वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,​
​मैं समन्दर से राज गहराई के सीखता रहा !​
प्रस्तुतिः नीतू ठाकुर