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Monday, March 6, 2017

दुख चाहे हो कितना भी नया.........जयप्रकाश मानस














पुराने हो जाते हैं 
एक दिन 
कागज, कलम, दवात, स्याही
पुराना हो जाता है कवि, 
एक दिन सारी पुस्तकें
सारे पाठक हो जाते हैं 
एक न एक दिन पुराने
हो जाते हैं एक दिन
मुद्रक, प्रकाशक, वितरक, 
आलोचक सबके सब पुराने
आख़िर एक दिन 
समय भी हो जाता पुराना
दुख चाहे हो कितना भी नया
कविता कभी होती नहीं पुरानी
-जयप्रकाश मानस


वर्तमान में आदरणीय जयप्रकाश जी मानस 
छत्तीसगढ़ शासन में वरिष्ठ अधिकारी हैं
srijangatha@gmail.com

वेबसाईट – www.srijangatha.com



Friday, January 15, 2016

बेटियाँ.....जयप्रकाश मानस











आँगन में 
चहकती हुईं गौरेया
देखते-ही-देखते पहाड़ हो गई

आख़िर एक दिन उन्हें
घोंसले से दूर कहीं खदेड़ दिया गया

लेकिन गईं कहाँ वे ढीठ!

अब वे नदी की तरह उतरती रहती हैं
उदास आँखों में
पारी-पारी से











-जयप्रकाश मानस
वेबसाईट : www.srijangatha.com
सम्पर्क : srijangatha@gmail.com