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Monday, November 20, 2017

अबकी बार लौटा तो .......कुंवर नारायण सिंह


1927-2017
अबकी बार लौटा तो 
बृहत्तर लौटूंगा 
चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं 
कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं 
जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को 
तरेर कर न देखूंगा उन्हें 
भूखी शेर-आँखों से 

अबकी बार लौटा तो 
मनुष्यतर लौटूंगा 
घर से निकलते 
सड़को पर चलते 
बसों पर चढ़ते 
ट्रेनें पकड़ते 
जगह बेजगह कुचला पड़ा 
पिद्दी-सा जानवर नहीं 

अगर बचा रहा तो 
कृतज्ञतर लौटूंगा 

अबकी बार लौटा तो 
हताहत नहीं 
सबके हिताहित को सोचता 
पूर्णतर लौटूंगा
- कुंवर नारायण सिंह



Monday, December 5, 2016

ये लोग पागल हो गए हैं..... नासिर काज़मी


तेरे से मिलने को बेकल हो गए
मगर ये लोग पागल हो गए हैं 

बहारें ले के आए थे जहां तुम 
वो घर सुनसान जंगल हो गए हैं 

यहां तक बढ़ गए आलाम-ए-हस्ती 
कि दिल के हौसले शल हो गए  

कहाँ तक ताब लाए नातवां दिल
कि सदमे अब मुसलसल हो गए हैं

उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना
यहां जो हादिसे कल हो गए हैं, 

जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर' 
वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं 

-नासिर काज़मी