Showing posts with label विशाल मौर्य विशु. Show all posts
Showing posts with label विशाल मौर्य विशु. Show all posts

Saturday, May 20, 2017

वो दरबदर हो गया है....विशाल मौर्य विशु


जमाने को भी ये खबर हो गया है
मुहब्बत तो तनहा सफर हो गया है

ना तो दिन ढलते हैं ना ही रातें गुजरती
जुदाई का  ऐसा  असर  हो गया है

जहाँ ख्वाबों का मेला लगता था हर पल
शहर दिल  का वो  दरबदर हो गया है

उसे चाहा था हमने साँसों की तरह
किसी और का वो मगर हो गया है
-विशाल मौर्य विशु

Tuesday, May 16, 2017

चाहा था हमने साँसों की तरह....विशाल मौर्य विशु


जमाने को भी ये खबर हो गया है
मुहब्बत तो तनहा सफर हो गया है

ना तो दिन ढलते हैं ना ही रातें गुजरती
जुदाई का  ऐसा  असर  हो गया है

जहाँ ख्वाबों का मेला लगता था हर पल
शहर दिल  का वो  दरबदर हो गया है

उसे चाहा था हमने साँसों की तरह
किसी और का वो मगर हो गया है
-विशाल मौर्य विशु

Sunday, April 2, 2017

तुम मरते किरदार को जिन्दा रखो.....विशाल मौर्य विशु


दुश्मन के हर वार को जिन्दा रखो
जीतोगे, बस हार को जिन्दा रखो

हर झूठ को दफ्न हो ही जाना है
सच लिखते अखबार को जिन्दा रखो

पहचान तो मिल ही जायेंगी कभी
तुम मरते किरदार को जिन्दा रखो
-विशाल मौर्य विशु

Sunday, March 26, 2017

ये भी मेरा है और वो भी मेरा ही है.....विशाल मौर्य विशु


यार अब  तो ऐसा  आलम  हो गया है
मेरा हर इक जख्म मरहम हो गया है

कुछ दिनों से वो नज़र आया नहीं के
तनहा तनहा सा ये मौसम हो गया है

हंसते हैं सब, खुश मगर कोई नहीं है
आदमी का आँसू हमदम हो गया है

ये भी मेरा है और वो भी मेरा ही है
हाय मुझको  कैसा  भ्रम  हो गया है
-विशाल मौर्य विशु