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Sunday, January 3, 2021

मेरी ग़ज़ल पढ़ेगा कौन .....नवीन मणि त्रिपाठी

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उनकी बात सुनेगा कौन ।
ज़िद पर आज़ झुकेगा कौन ।।

की है बगावत जनता ने ।
साहब तुम्हें चुनेगा कौन ।।

बिक जाते हैं चैनल जब ।
सच को आम करेगा कौन ।।

दिल्ली की सर्दी से अब ।
तन कर और लड़ेगा कौन ।।

हम पर कीचड़ फेंक रहा ।
तेरे साथ चलेगा कौन ।।

ताना शाही चेहरे पर ।
तुझसे दर्द कहेगा कौन।।

आएं फिर सत्ता में वो ।
आपना हाथ मलेगा कौन ।।

सोच समझ कर निर्णय ले ।
कल तुझको पूछेगा कौन ।।

मैं कड़ुआ सच लिखता हूँ ।
मेरी ग़ज़ल पढ़ेगा कौन ।।
-नवीन मणि त्रिपाठी

Friday, September 11, 2020

अब अना से बढ़ रहीं नज़दीकियां...-डॉ.नवीन मणि त्रिपाठी


2122 2122 212
मत  कहो हमसे  जुदा  हो  जाएगा ।
वह  मुहब्बत  में  फ़ना हो  जाएगा ।।

इश्क  के  इस दौर में दिल आपका ।
एक  दिन  मेरा   पता  हो  जाएगा ।।

धड़कनो   के   दरमियाँ  है  जिंदगी ।
धड़कनो का सिलसिला हो जाएगा ।।

इस  तरह  उसने  निभाई  है कसम ।
वह   हमारा    देवता   हो  जाएगा ।।

ऐ   दिले  नादां  न  कर  मजबूर  तू ।
वो  मेरी ज़िद पर ख़फ़ा हो जाएगा ।।

पत्थरो को  फेंक कर  तुम  देख लो ।
आब  का  ये कद  बड़ा हो जाएगा ।।

मत निकलिए इस तरह से बेनकाब ।
फिर  चमन में  हादसा  हो  जाएगा ।।

अब अना से बढ़  रहीं  नज़दीकियां ।
रहमतों   से   फ़ासला  हो  जाएगा ।।
-डॉ.नवीन मणि त्रिपाठी