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Tuesday, November 18, 2014

भाषा..............सुधीर कुमार सोनी




 








मजबूरी
भाषा बदल देती है
अभिमान
बहुत सी परिभाषा बदल देते हैं.... 


-सुधीर कुमार सोनी

Saturday, September 20, 2014

पेड़............. सुधीर कुमार सोनी





 











मैंने
कागज पर लकीरें खिचीं
डाल बनाई
पत्ते बनाए
अब कागज पर
चित्र लिखित सा पेड़ खड़ा है

पेड़ ने कहा
यह मैं हूं
मुझ पर काले अक्षरों की दुनिया रचकर
किसे बदलना चाहते हो

मैंने
रंगों से कपड़ों में
कुछ लकीरें खींचीं
डाल बनाई
पत्ते बनाए
अब
कपड़े पर छपा पेड़ है
पेड़ ने कहा
यह मैं हूं
मुझे नंगा कर
किसे ढंकना चाहते हो

यह जो तुम हो
पेड़ ने कहा
यह भी मैं हूं
सांसों पर रोक लगाकर
किसे जीवित रखना चाहते हो। 


-सुधीर कुमार सोनी

प्राप्ति स्रोतः काव्य संसार, वेब दुनिया