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Saturday, July 25, 2015

कुछ नई परिभाषाएँ...निधि मेहरोत्रा



व्यापारी
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
दिल की जेब में खनकती रेज़गारी है

डॉक्टर
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
अमां ये तो इक लाइलाज बीमारी है

किसान
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा 
तैयार फसल के कटने की तैयारी है

पुलिस
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा 
वो गुनाह जिसकी सज़ा ताउम्र पे भारी है

इंजीनियर
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा 
यक़ीन की नींव पे निर्माण कार्य जारी है

फौजी
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा 
अपने ही जज़्बातों से रोज़ जंग हमारी है

संगीतज्ञ
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
दिल के राग पर धड़कनों की धुन प्यारी है

शेफ
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
हर बार कुछ लज़ीज़ बनाने की ज़िम्मेदारी है

वैज्ञानिक
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
क्यों है, क्या है, प्रयोग अभी तक जारी है

टीचर
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
सबक पढ़ पढ़ाने के बाद ज़िन्दगी न्यारी है

वक़ील
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा 
कुछ हो जाए इसके आगे दुनिया हारी है

लेखक
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
सबने लिखा है इसे अबकि मेरी बारी है

मैं
प्यार है क्या सोचो तो ज़रा
कुछ नहीं तेरा मेरा जिसमें ये जागीर हमारी है

-निधि मेहरोत्रा