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Friday, May 8, 2020

बोलो माँ ! आज कहाँ तुम हो ...रेणुबाला

बोलो माँ ! आज कहाँ तुम हो ,
है अवरुद्ध कंठ ,सजल नयन
बोलो ! माँ आज कहाँ तुम हो ?
कम्पित अंतर्मन -कर रहा प्रश्न -
बोलो माँ आज कहाँ तुम हो ?

जिसमें समाती थी धार
मेरे दृग जल की,
खो गई वो छाँव
तेरे आँचल की ;
जीवन रिक्त स्नेहिल स्पर्श बिन
बोलो ! माँ आज कहाँ तुम हो ?

हुआ आँगन वीरान माँ तुम बिन -
घर बना मकान माँ तुम बिन ,
रमा बैठा धूनी यादों की -
मन श्मशान बना माँ तुम बिन -
किया चिर शयन -चली मूँद नयन -
बोलो ! माँ आज कहाँ तुम हो ?

तेरा अनुपम उपहार ये तन -
साधिकार दिया बेहतर जीवन --
तेरी करुणा का मैं मूर्त रूप -
तेरे स्नेहाशीष संचित धन ;
ले प्राणों में थकन निभा जग का चलन-
बोलो माँ ! आज कहाँ तुम हो !!!!!!
-रेणुबाला