
1.
हां मैं प्रेम में हूं,
प्रेम मुझमें है
तुम ना कहो ना सही
मैंने तो हर मोड़ पर
हर बार यह बात कही....
पर हर बार
तुम्हारी 'वह' बात
हमेशा बची रही...
जो तुमने कभी नहीं कही...
2.
इससे पहले कि तुम
लाकर रखो हरसिंगार मेरे सिरहाने
इससे पहले कि
गुलमोहर की ललछौंही पत्तियां
इकट्ठा करो तुम मेरे लिए
और इससे पहले कि तुम लेकर आओ
ढेर सारे ताजे गुलाब
मेरे मंदिर के लिए...
मैं देती हूं अपने शब्दों के सच्चे गुलाबी फूल
कि तुम से ही महका है मन-उपवन
मेरी धरा, मेरा गगन...

-स्मृति पाण्डेय (फाल्गुनि)
