तेरी बेवफाई का शिकवा सनम !
मै किसी से कर नही सकती !!
है गुनाहगार तू मेरा कहकर !
साहिब आहें भर नही सकती!!
इल्जाम क्या दूं मै तुझको !
बिन आइना संवर नही सकती !!
की हिमाकत मैने जहां मे सनम !
संगदिलो से जंग लड़ नही सकती !!
अब तो खुदाया का आसरा है !
दर्दे-दिल से अब गुजर नही सकती !!
लिख दूं नाम तेरा हर हरफ पर!
शरारत मै ऐसी कर नही सकती !!
तारीफ क्या करूं उस नाचीज की !
आबरू जिसकी बिगड़ नही सकती !!
आंखो से गिरे है मोती हजारो !
दामन खाली ये भर नही सकती !!
तराना क्या छेड़ू ग़ज़ल मे !
प्रीत बिन मुकम्मल कर नही सकती !!
कुछ नया कर जाऊं तो अच्छा!
आखिरी दम मगर पढ़ नही सकती !!
सात फेरे सात जन्मों का बंधन!
सात आरजुये मगर निखर नही सकती!!
कर जाये वो वफा तेरे साथ भी!
उम्मीद न कर ठहर नही सकती !!
तेरी पालकी में चार फूल अच्छे !
तेरे नाम से बगिया बिखर नही सकती !!
-प्रीती श्रीवास्तव..