Monday, August 19, 2019

बाकि है तन्हा सफ़र तेरा ...पूजा प्रियंवदा

कितनी अँधेरी रातों के बाद 
कितने अकेले सफ़र तमाम 
परिंदे ने कहीं फ़िर 
आसरे की उम्मीद कर ली थी


घर ने कहा तू लौट जा 

कोई और अब रहता है यहाँ 
बाकि है तन्हा सफ़र तेरा !


लौटा है सफ़र में 

अकेला परिंदा 
फ़कीर रूह न किसी की 
न कहीं इसका बसेरा
- पूजा प्रियंवदा

Sunday, August 18, 2019

ख़याल ही सबूत है...गुलज़ार

बुरा लगा तो होगा ऐ खुदा तुझे,
दुआ में जब,
जम्हाई ले रहा था मैं--
दुआ के इस अमल से थक गया हूँ मैं !
मैं जब से देख सुन रहा हूँ,
तब से याद है मुझे,
खुदा जला बुझा रहा है रात दिन,
खुदा के हाथ में है सब बुरा भला--
दुआ करो !
अजीब सा अमल है ये 
ये एक फ़र्जी गुफ़्तगू,
और एकतरफ़ा--एक ऐसे शख्स से,
ख़याल जिसकी शक्ल है 
ख़याल ही सबूत है.
-गुलज़ार

Saturday, August 17, 2019

स्वर्ग होता है कहाँ..... अरुण

मुझसे..
मत पूछिये.
कि मैं क्या लाया.
पालकी प्यार की.
सजा  लाया | 
..........
जागता है वो   
अब मेरी तरह.
नींद उसकी.
आँखों से ही 
चुरा लाया |
..............

उसने..
पूछा कि..   
चाँद कैसा है
आइना उसे   
बस दिखा दिया |
................
स्वर्ग....
होता है कहाँ.....,
बताना था उसे
मैं गाँव अपना...
उसे घुमा लाया...
..............
गम नहीं है 
हमें जुदाई का 
आपसे, 
फिर मिलेंगे  
अगर खुदा चाहे |
-अरुण

Friday, August 16, 2019

समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में...यशोदा अग्रवाल

क्या है...
ये कविता..
क्यों लिखते हैं....
झांकिए भीतर
अपने जिन्दगी के
नजर आएगी  एक
प्यारी सी कविता
सुनिए ज़रा
ध्यान से...
क्या गा रही है 
ये कविता....
देखिए इस नन्हें बालक
की मुस्कुराहट को
नज़र आएगी एक
प्यारी सी
मुस्काती कविता....
दिखने वाली
सभी कविताएँ
जिनमें..
हर्ष है और
विषाद भी है
सर्जक है
विध्वंसक भी है
इसमे संयोग है...
और वियोग भी है
है पाप भी 
और प्रेम का
प्रदर्शन का
संगम है
समाई हुई हैं
इसी जिन्दगी में
ये प्यारी सी 
कविता...!!

लेखिका परिचय - यशोदा अग्रवाल 

Thursday, August 15, 2019

सुख की परछाई है पीड़ा....अनीता जी


सुख की चादर ओढ़ी ऐसी
धूमिल हुई दृष्टि पर्दों में,
सच दिनकर सा चमक रहा है
किन्तु रहा ओझल ही खुद से !

सुख मोहक धर रूप सलोना
आशा के रज्जु से बांधे,
दुःख बंधन के पाश खोलता
मन पंछी क्यों उससे भागे ?

सुख की परछाई है पीड़ा
दुःख जीवन में बोध जगाता,
फिर भी अनजाना भोला मन
निशदिन सुख की दौड़ लगाता !

क्यों उस सुख की चाह करें जो
दुःख के गह्वर में ले जाये,
अभय अंजुरी पीनी होगी
तज यह भय सुख खो ना जाये !!


Wednesday, August 14, 2019

मौन रह कर मैं मुखर होना सीख रही हूँ....मीना भारद्वाज

मौन रह कर मैं ,
मुखर होना सीख रही हूँ ।
समझदारी के बटखरों से ,

 शब्दों का  वजन ।
मैं भी आज कल ,
तौलना सीख रही हूँ ।
रिक्त से कैनवास पर ,

इन्द्रधनुषी सी कोई तस्वीर ।
बिना रंगों की पहचान ,
उकेरना सीख रही हूँ ।
घनी सी उलझन की ,

उलझी सी गाँठों को ।
मन की अंगुलियों से ,
खोलना सीख रही हूँ ।
भ्रमित हूँ , चकित हूँ ,


दुनिया के ढंग देख कर ।
बन रही हूँ  कुशल ,
नये कौशल सीख रही हूँ ।
भौतिक नश्वरता के दौर में ,
मैं भी आज कल ;
दुनियादारी सीख रही हूँ ।

लेखक परिचय - मीना भारद्वाज 

Tuesday, August 13, 2019

हसरतों की इमलियाँ ....नीरज गोस्वामी

याद करने का सिला मैं इस तरह पाने लगा
मुझको आईना तेरा चेहरा ही दिखलाने लगा


दिल की बंजर सी ज़मी पर जब तेरी दृष्टि पड़ी

ज़र्रा ज़र्रा खिल के इसका नाचने गाने लगा



ज़िस्म के ही राजपथ पर मैं जिसे ढूँढा सदा

दिलकी पगडंडी में पे वोही सुख नज़र आने लगा


हसरतों की इमलियाँ गिरती नहीं हैं सोच से

हौसला फ़िर पत्थरों का इनपे बरसाने लगा


रोक सकता ही नहीं हों ख्वाइशें जिसकी बुलंद

ख़ुद चढ़ा दरिया ही उसको पार पहुँचने लगा


तेरे घर से मेरे घर का रास्ता मुश्किल तो है

नाम तेरा ले के निकला सारा डर जाने लगा


बावरा सा दिल है मेरा कितना समझाया इसे

ज़िंदगी के अर्थ फ़िर से तुझ में ही पाने लगा


सोचने में वक्त "नीरज" मत लगाना भूल कर

प्यार क़ातिल से करो गर वो तुम्हे भाने लगा 

-नीरज गोस्वामी