Tuesday, January 19, 2021

रंगों का मौसम ...मंजू मिश्रा

रंगों का मौसम 

पतंगों का मौसम 

तिल-गुड़ की सौंधी मिठास का मौसम 

लो शुरू हुआ नया साल  ।१।


मौसम का मिज़ाज बदला

हवा का अन्दाज़ 

और बदली सूर्य की चाल 

लो शुरू हुआ नया साल ।२।


उड़ती पतंगें यूँ लगें 

मानो आसमाँ पे बिछ गयी 

रंगों की तिरपाल 

लो शुरू हुआ नया साल ।३।

-मंजू मिश्रा

Monday, January 18, 2021

रज़ा ...डॉ. नवीनमणि त्रिपाठी


जिनको तेरी रज़ा नहीं मिलती ।
आशिक़ी को हवा नहीं मिलती ।।
इश्क़ गर बेनक़ाब होता तो।
हिज्र की ये सज़ा नहीं मिलती ।।
ज़ीस्त है जश्न की तरह यारो ।
ज़िन्दगी बारहा नहीं मिलती ।।
कितनी बदली है आज की दुनिया ।
आंखों में अब हया नहीं मिलती ।।
नेकियाँ डाल दे तू दरिया में ।
बेवफ़ा से वफ़ा नहीं मिलती ।।
कुछ तो महफ़िल का रंग बदला है ।
घुँघरुओं की सदा नहीं मिलती ।।
मैं ख़तावार तुझको कह देता ।
क्या करूँ जब ख़ता नहीं मिलती ।।
छोड़ हर काम बस इबादत हो ।
यूँ ख़ुदा की दया नहीं मिलती ।।
वक्ते रुख़सत जहाँ हो तय साहब ।
माँगने पर क़ज़ा नहीं मिलती ।।
कब से क़तिल हुआ ज़माना ये ।
जुल्म की इब्तिदा नहीं मिलती ।।
वो तो नाज़ुक मिज़ाज थी शायद ।
आजकल जो खफ़ा नहीं मिलती ।।
- डॉ.नवीनमणि त्रिपाठी

2122 1212 22 

Sunday, January 17, 2021

स्त्री विमर्श ...निधि सक्सेना

एक युवा पुरुष को
अलग अलग उम्र की स्त्रियां
अलग अलग स्वरूप में देखेंगी..
नन्ही बच्ची उसे पिता या भाई सा जानेगी..
युवा होगी तो झिझकेगी सकुचायेगी
उसमें सखा या मित्र खोजेगी..
प्रौढ़ा होगी तो उसे अनायास ही वो अपने पुत्र सा दिखाई देगा..
और वृद्धा हुई तो उसे देखते ही उसका पोपला मुख कह उठेगा
बिल्कुल मेरे पोते सा है ..
परंतु एक युवा स्त्री
अलग अलग उम्र के पुरुषों को
केवल एक स्वरूप में दिखाई देगी
स्त्री स्वरूप में
विशुद्ध स्त्री स्वरूप...
कि स्त्रियां उम्र के हिसाब से परिपक्व होना जानती हैं..
- निधि सक्सेना

Saturday, January 16, 2021

बहुत कमा लिया .....नीलम गुप्ता

बहुत कमा लिया
सब कहते है
कितना लिखती हो?
इतना क्यों लिखती हो?
लिख कर क्या कमा लिया?
कौन सा खेत उखाड़ लिया?
शायद सच ही कहते होंगे
ये उनके तजुर्बे होंगे
हर चीज में नफा
नुकसान देखते है
हर किसी को
तराजू में तोलते है
तो बता दूं हमनें भी बहुत
दौलत रख ली
जेबें दुआओं से भर लीं
कितनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी
कितनो की जिंदगी दुहरा दीं
कितनों के दिल में बस गई
उनको मेरी आदत सी लग गई
कविता ही मेरी, जिंदगी हो गई
अब ये असल में मायने हो गई
जिस दिन दुनिया से जाऊंगी
कुछ दुआएं भी ले जाऊंगी
लोग कमा लिए इतने
कि कुछ तो मेरे जाने
से गमगीन रहेंगे
मेरी कविता को ही
मेरे लिए गुनगुना देंगे
स्वरचित

-नीलम गुप्ता 

Friday, January 15, 2021

क्या फायदा......डॉ. अंशु सिंह

 
बोझ लगता हो ग़र जिंदगी मे कोई 
यादें उसकी सजाने से क्या फ़ायदा 

चुभ रहा हो जो बन करके तीखा सुआ 
प्यार उस पर लुटाने से क्या फ़ायदा 

जिसको पल भर मे बाहर किया झाड़ के 
कविता उस पर बनाने से क्या फ़ायदा 

कच्चा धागा ही था , टूट पल में गया 
प्यार को फिर बढ़ाने से क्या फ़ायदा 

अर्थ समझे न जब ज़िन्दगी के कभी 
व्यर्थ  जीवन गँवाने  से क्या फ़ायदा 

मित्र बन मोल आँसू के समझो कभी 
बात केवल बनाने से क्या फ़ायदा 

सार जीवन के तुम यदि समझ न सके 
स्वप्न गिरवी रखाने से क्या फ़ायदा 

जिसने जीवन की निस्सारता जान ली 
त्याग कर उसको जाने से क्या फ़ायदा 

मोह माया ही जब जग के रिश्ते अगर 
जग के रिश्ते  निभाने से क्या  फ़ायदा 

जग को मानो ना मानो ख़ुशी आपकी 
जग से ग़ुस्सा दिखाने से क्या फायदा .
-डॉ. अंशु सिंह

Thursday, January 14, 2021

बदलाव..... संजय भास्कर

घर से दफ्तर के लिए
निकलते समय रोज छूट
जाता है मेरा लांच बॉक्स और साथ ही
रह जाती है मेरी घड़ी
ये रोज होता हो मेरे साथ और
मुझे लौटना पड़ता है उस गली के
मोड़ से
कई वर्षो से ये आदत नहीं बदल पाया मैं
पर अब तक मैं यह नहीं
समझ पाया
जो कुछ वर्षों से नहीं हो पाया
वह कुछ महीनो में कैसे हो पायेगा
अखबार के माध्यम से की गई
तमाम घोषणाएं
समय बम की तरह लगती है
जो अगर नहीं पूरी हो पाई
तो एक बड़े धमाके के साथ
बिखर जायेगा सबकुछ......!!
- संजय भास्कर

Wednesday, January 13, 2021

हम भी कहां सुधरते हैं .....मेजर (डॉ.)शालिनी सिंह

वो नहीं बदलता तो हम भी कहां सुधरते हैं
वो घात करता है तो हम ऐतबार करते हैं
उकता गये हैं अब उन्हीं पुराने जख्मों से
तुम नया वार करो हम नईं आह भरते हैं
उसकी हर चाल में कई चाल छुपी होती हैं
समझते हैं हम पर कहां बचाव करते हैं
ठगे जाते हैं हर बार इक ही तरीके से
कमाल उसका है या हम कमाल करते हैं
राज़ जान लेते हैं उसकी आंखें पढ़ कर
फिर क्यूं उससे फिजूल सवाल करते हैं
हर फसाद की जड़ है जिद्दी यह दिल मेरा
लौटा लाता है जब भी उससे तौबा करते हैं
झूठे इकरार की फितरत है या फिर लत उसको
हर किसी से कहता है सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं
काश आ जाये दर्द महसूस करने की सलाहियत उसे
समझ जायेगा खुद कि आखिर मुहब्बत किसे कहते हैं
- मेजर (डॉ.)शालिनी सिंह