Sunday, October 25, 2020

हुई हैं उनसे मुलाकातें ...इश्तियाक अंसारी


अभी कुछ कुछ हुआ है उजाला

पर सवेरा होना बाकी है।


अभी मिली हैं आँखें उनसे

पर दिल मिलना बाकी है।


पेड़ों के अभी कुछ कुछ पत्ते झरे हैं

पर हरियाली अभी बाकी है।


अभी तो मैंने देखा है एक चाँद

पर उससे मुलाकात अभी बाकी है।


सुसख हवा चली है कुछ कुछ

पर गर्मी आना बाकी है।


अभी दो चार हुई हैं उनसे मुलाकातें

पर अभी प्यार होना बाकी है


-इश्तियाक अंसारी 

Saturday, October 24, 2020

एक श्रृंगारिक हिंदी गज़ल ...माण्डवी


याद आते बहुत पर तुम आते नहीं,
क्या कभी हम तुम्हें याद आते नहीं।

याद में आपके दिल परेशान है,

आप तो अपना वादा निभाते नहीं।

याद आते रहे तुमको हम भी बहुत,

क्यों कभी तुम हमें यह बताते नहीं।

जान से भी वो ज्यादा मुझे चाहते,
प्यार अपना मगर वो जताते नहीं।

आपके प्यार में हम दीवाने हुए,
जानते तो हैं पर बोल पाते नहीं।
-माण्डवी




Friday, October 23, 2020

तस्वीर बोलती है __अलका गुप्ता 'भारती'


निकली ही क्यूँ ...
नंगे पाँव गोरी ।
दिखी नहीं ता पै...
धूप निगोड़ी ॥ 
नाजुक कमरिया...
थामें  गगरिया ।
रूप साजे हाय !
धारि ..कटरिया ॥
जालिम है जमाना...
ये ..नजरिया ।
संभल मग भरे...
शूल कंकरिया ॥
लद गए दिन ...
पनिहार पनघट के ।
जंचे अब ना ये ...
लटके झटके ॥

-अलका गुप्ता 'भारती' 







Wednesday, October 21, 2020

#दाग अच्छे है ...नीलम गुप्ता


 #दाग अच्छे है
दाग पर ना जा
दाग है तभी हम सच्चे है 
दाग बहुत अच्छे है
सफ़ेद कुर्ती पर लगा दाग
क्यों आंखों को नहीं भाता
इस दाग से ही तो
रचता संसार सारा
क्यों शराब खुले में
पैड काली पन्नी 
में लाए जाते
उन पांच दिनों की कीमत
क्यों लोग समझ ना पाते
रचा ब्रह्मांड उन दागों से ही
फिर क्यों उन पांच दिनों की
कोई बात नहीं करता
उन दिनों के दर्द को
कोई नहीं समझता
क्यों छुपा छुपा कर 
क्यों बचा बचा कर
इस तस्वीर में रंग भरते है
क्यों नहीं कहते
ये दाग बहुत ही अच्छे है

स्वरचित

-नीलम गुप्ता

Tuesday, October 20, 2020

अजन्मी ..विनय के. जोशी

 

जर्जर काया
पराश्रित जीवन
बुढ़ापा भरी
उस पर नारी .....

मैं कौन ?
मेरी ख्वाहिशें क्या ?
अधेड़ प्रौढ़ा
कुल की माया
नाती-पोतों की आया
उपेक्षा के बदले
वारी वारी ........

लहलहाती फसल
खनकता कुन्दन
श्रृंगारित दासी
जर जमीन जोरू
जागीरदारी ........

आदमखोर स्वछंद
मासूम कैद
संभल कर चलो
ओ नारी !
अभी हो कुंवारी ....
दूध भैया का .....
खिलौने भैया के ......
स्कूल भैया जाएगा ..........

उफ !
बहुत बुरा है,
दो पैरों का जानवर
अपनी मादा के साथ |
शुक्र है मैं मुक्त हूँ
उन्मुक्त हूँ
जीवन रहा नही
मरण वार दिया
तन तारिणी
वन्ही (अग्नि) सागर
पल में पार किया ...

सांसें लेती
लाशों ने मुझे
कोख ही मे मार दिया
-विनय के जोशी


Saturday, October 17, 2020

एक मुस्कान में बिकता हूँ... -विनय के. जोशी

भले ही नागफनी सा दिखता हूँ.
ग़ज़ल बड़ी मखमली लिखता हूँ..

क़दर नहीं, पर हासिल भी नहीं.
वैसे, एक मुस्कान में बिकता हूँ..

फूलों की खबर रूहों को देनी है
पवन हूँ, एक जगह कहाँ टिकता हूँ

कामयाब बुर्ज पर परचम तुम्हारा
मैं शिकस्तों के गांव में छिपता हूँ

यकजां आईने में अक्स बिखरा था
हुई जो किरचें, तो साफ दिखता हूँ
-विनय के. जोशी..

Friday, October 16, 2020

तस्वीर यह बोली ...अलका गुप्ता 'भारती'



मुखर हो जाएं जहाँ वाचाल मौन ।
तस्वीरें वह भला न कुरेदे कौन ॥ 

पन्ना पलटे चेहरे का हर भाव ।
देकर दगा कभी प्रीत कभी दाँव ॥

जीवन ज्यों हो मुखौटों की पुस्तक ।
मृदुल कभी नीरसता की है दस्तक ॥

अंतर्मन का है ..प्रतिबिम्ब दहकता । 
जग संग्राहलय ..यह हँसता गाता ।

दंश देते ..अवसाद विषाद.. जड़ित ।
हैं शान्ति अभिलाषी मन गहन गणित॥ 

-अलका गुप्ता 'भारती'