Showing posts with label अनिरुद्ध सिन्हा. Show all posts
Showing posts with label अनिरुद्ध सिन्हा. Show all posts

Friday, October 20, 2017

हमेशा हाथ ही मलता रहा......अनिरुद्ध सिन्हा

धूप को सर पर लिये  चलता रहा
मैं ज़मीं के साथ  ही जलता रहा

नफ़रतों के  जहर पीकर  दोस्तो
प्यार के साँचे में मैं  ढलता रहा

टूटकर इक दिन बिखर जाऊँगा मैं
मेरे अन्दर  खौफ़ ये  पलता रहा

लौट आया आसमां को  छूके  मैं
जलनेवाला उम्र- भर जलता  रहा

लोग अपनी मंज़िलों को  हो लिये
वो  हमेशा  हाथ  ही मलता रहा

-अनिरुद्ध सिन्हा
गुलज़ार पोखर, मुंगेर (बिहार )811201
Email-anirudhsinhamunger@gmail.com
Mobile-09430450098  

Thursday, May 4, 2017

तलाश में निकला है आईना लेकर.....अनिरुद्ध सिन्हा


दुआ के बदले में  लोगों की बद दुआ लेकर
निकल पड़े  हैं सफ़र में न जाने क्या लेकर

सवाल  ये  है कि मिलने  के बाद भी देखो
सिसक रहे हैं  वो यादों का सिलसिला लेकर

किसी भी घर में  मुहब्बत  हमें नहीं मिलती
भटक  रहे  हैं  अदावत  का  फासला लेकर

वफ़ा  खुसूस  मुहब्बत  ये खो  गए हैं कहाँ
तलाश  आज  भी करते हैं  हम दिया लेकर

कि जिसका चेहरा मुकम्मल न हो सका अबतक
मेरी  तलाश  में  निकला  है  आईना  लेकर
- अनिरुद्ध सिन्हा 
गुलज़ार पोखर, मुंगेर (बिहार)811201

Email-anirudhsinhamunger@gmail.com

Mobile-09430450098

Tuesday, March 28, 2017

टूटे हैं कुछ हसीं दिल जहां में......अनिरुद्ध सिन्हा


इतने आँसू  मिले  ज़िन्दगी से
और क्या चाहिए अब किसी से

खुद नशेमान से बाहर हुए हम
अपने  लोगों  की  बेचारगी से

रात गुज़री  महज़ करवटों  में
ज़ख्म मिलता  रहा रौशनी से


टूटे हैं कुछ हसीं दिल जहां में
दुश्मनी  से  नहीं  दोस्ती  से


जिस सलीके से सबसे है मिलता
लूट  लेगा  कभी  सादगी से
-अनिरुद्ध सिन्हा