Showing posts with label पंकज शर्मा. Show all posts
Showing posts with label पंकज शर्मा. Show all posts

Monday, October 15, 2018

खुद से बिछड़ने की क्या थी वज़ह.....पंकज शर्मा


तेरे खामोश होने की क्या थी वज़ह,
कि फिर लौट न आने की क्या थी वज़ह।

तेरे होने न होने का अब फर्क नहीं पड़ता,
साथ होकर भी साथ न होने की क्या थी वज़ह।

बीती बातों का क्यों अफसोस है तुझे,
ग़ज़ल लिखने की क्या थी वज़ह।

मगरूर हुए वो कुछ इस तरह,
दिल टूट बिखर जाने की क्या थी वज़ह।

बातें तुम करती हो फ़लां फ़लां की,
खुद से बिछड़ने की क्या थी वज़ह।
-पंकज शर्मा

Friday, April 7, 2017

सियासत........पंकज शर्मा


ज़र्रा ज़र्रा दहक उठता है,
जब बेबात अदावत होती है।

हर कोना कोना रिसता है..
जब कोई शहादत होती है।

कुछ बड़ी मीनारें झुक जावे
कुछ ठंडे छींटे दे जावे..
कुछ देर सलामी होती है।

दम घुट घुट के रह जाता है,
जब शहीदों पे सियासत होती है।
-पंकज शर्मा