जो दिखता है वो होता तो नहीं है
जो होता है वो सोचा तो नहीं है
चमकती दूर की हर चीज अक्सर
दिखे सोना वो सोना तो नहीं है
हमेशा मुस्कुराता देखा जिसको
वही छुप-छुप के रोता तो नहीं है
मुहब्बत से बने इक आशियाँ में
कोई तन्हा भी खोया तो नहीं है
नज़र बोतते हैं बात दिल की
ज़ुबां अबतक ये खोला तो नहीं है
हमारा दूर का क्या उससे नाता
करीबी उसने बोला तो नहीं है
हमारे साथ जगने की तमन्ना
ले अबतक चाँद सोया तो नहीं है

