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Tuesday, November 27, 2018

अक्स तुम्हारा (हाइकु)............डॉ. सरस्वती माथुर

अक्स तुम्हारा (हाइकु)

1
मोर है बोले
मेघ के पट जब
गगन खोले 
2
वक्त तकली
देर तक कातती
मन की सुई l
3
यादों के हार
कौन टाँक के गया
मन के द्वार 
4
अक्स तुम्हारा
याद आ गया जब
मन क्यों रोया ?
5
यादों से अब
मेरा बंधक मन
रिहाई माँगे 
6
यादों की बाती
मन की चौखट को
रोशनी देती l
7
साँझ होते ही
आकाश से उतरी
धूप चिरैया 
8
धरा अँगना
चंचल बालक सी
चलती धूप 
9
भोर की धूप
जल दर्पण देख
सजाती रूप 
10
मेघ की बूँदें
धरा से मिल कर
मयूरी हुई

-डॉ. सरस्वती माथुर

Tuesday, September 4, 2018

हाइकु.......डॉ. सरस्वती माथुर


तारा टूटा तो
 आसमां से दूर हो
 अनाथ हुआ ।
-*-
 अँधेरी रात
 पीली चाँदनी बनी
 रोशनदान ।
-*-
 ऊँची पहाड़ी 
 बर्फ जड़ी -पिघली 
 नदिया बनी ।
-*-
 धरा महकी
 पुष्प अगरबत्ती
 जब जलाई ।
-*-
 छोड़ तरु को 
 पतझड़ी पात भी
 संत से लगे ।
- डॉ. सरस्वती माथुर
5 अगस्त को आपने अपना जन्म दिन मनाया
सबने बधाइयां प्रेषित की...क्या पता था कि 
ये उनका अंतिम जन्म दिन है
गत् शनिवार को वे देवलोक गमन कर गई
परमपिता से विनती है
उन्हें अपनी चरणों में स्थान दें
हम सभी की ओर से भाव-भीनी श्रद्धाञ्जली

Friday, December 22, 2017

बसंत आया (ताँका).....डॉ. सरस्वती माथुर


1. 
बसंत राग
धरा गगन छाया
सुमन खिलाने को
ऋतुराज भी
कोकिल सा कूकता
मधुबन में आया।
2.
सरसों झूमा
बासंती मौसम में
खेतों में लहराया
धरा रिझाने
तरूवल्ली सजाने
बसंतराज आया।
3.
बौराया मन 
कोयलिया पंचम
राग छेड़ती डोले
ओढ़ कर चूनर
बासंती रंग संग 
फूल पात पे डोले।
4.
प्रीत के गीत
गुनगुनाता आया
पीताम्बर डाल के
बसंत छाया
कोयलिया कुहकी
पलाश दहकाया।
-डॉ. सरस्वती माथुर

Monday, December 18, 2017

अक्स तुम्हारा.....डॉ. सरस्वती माथुर

1
मोर है बोले
मेघ के पट जब
गगन खोले l
2
वक्त तकली
देर तक कातती
मन की सुई l
3
यादों के हार
कौन टाँक के गया
मन के द्वार l
4
अक्स तुम्हारा
याद आ गया जब
मन क्यों रोया ?
5
यादों से अब
मेरा बंधक मन
रिहाई माँगे l
6
यादों की बाती
मन की चौखट को
रोशनी देती l 
7
साँझ होते ही
आकाश से उतरी
धूप चिरैया l
8
धरा अँगना
चंचल बालक सी
चलती धूप l
9
भोर की धूप
जल दर्पण देख
सजाती रूप l
10
मेघ की बूँदें
धरा से मिल कर
मयूरी हुई

-डॉ. सरस्वती माथुर