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Friday, April 6, 2018

आँख उनसे मिली तो सजल हो गई....डॉ० (श्रीमती) तारा सिंह

आँख उनसे मिली तो सजल हो गई
प्यार बढ़ने लगा तो ग़ज़ल हो गई 

रोज़ कहते हैं आऊँगा आते नहीं
उनके आने की सुनके विकल हो गई 

ख़्वाब में वो जब मेरे करीब आ गये
ख़्वाब में छू लिया तो कँवल हो गई 

फिर मोहब्बत की तोहमत मुझ पै लगी
मुझको ऐसा लगा बेदख़ल हो गई 

वक्त का आईना है लबों के सिफ़र
लब पै मैं आई तो गंगाजल हो गई 

'तारा' की शाइरी किसी का दिल हो गई
ख़ुशबुओं से तर हर्फ़ फ़सल हो गई 
-डॉ० (श्रीमती) तारा सिंह