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Thursday, November 21, 2019

आखिरी बुजुर्ग ....कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

आज हो रहा गाँव की
नवनिर्मित रोड का उद्घाटन
यहां अकेले रह रहा आखिरी बुजुर्ग
गाँव छोड़ रहा है
अनमना होकर
किंतु समाप्त नहीं होता
हरे-भरे वृक्षों का मोह
मटके का पानी
मिट्टी का सौंधी महक
ठण्डी हवाएं, फूलों की महक
नहीं है खुश, गहरे दुःख में है
फिर भी जा रहा है दूर शहर
बहू-बेटे के साथ की खातिर
-कविता भट्ट 'शैलपुत्री


Thursday, June 6, 2019

स्त्री की दास्तां...डॉ. कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

मैं पानी हूँ..
तरल,स्वच्छ और नरम
ओ समय! तुम यदि पत्थर भी हो
तो कोई बात नहीं
चलती रहूँगी प्यार से
तुम्हारी कठोर सतह पर
धार बनकर
एक दिन तुम्हारी कठोर सतह
पर केवल मेरे निशान होंगे
और होगी कभी न थकने वाली
स्त्री की दास्तां...
डॉ. कविता भट्ट 'शैलपुत्री'