Showing posts with label नवभारत. Show all posts
Showing posts with label नवभारत. Show all posts

Tuesday, December 30, 2014

नया साल......आफताब बेगम














साल 2015 की
पहली सुबह की
पहली किरण
हमारे दरवाजे पर
दस्तक देने को
बेकरार है
और....हम भी
इसके स्वागत में
पूरे जोश के साथ
तैय्यार हैं
पर क्या सिर्फ
ज़श्न मना लेना और
मस्ती में झूम लेना ही
इन नए पलों का स्वागत है ?
शायद नहीं.
साल दर साल
हम यही तो करते आ रहे हैं,
इस बार कुछ ऐसा करते हैं
कि इस साल का हर पल
ज़िन्दामिसाल बन जाए.
अमन की राह पर चलें.
कुछ इस तरह जियें
और जीने दें कि
आने वाला साल
खुद प्यार की सौगात बन जाए.


-आफ़ताब बेगम
कलमकार....नवभारत

Thursday, September 11, 2014

मां की आँखें नम हो गई.....थानू निषाद "अकेला"

    










आंचल में छुपाते हुए
मां ने धीरे से कहा-
बेटी! डरो नहीं
अब तो मैं तुम्हारे पास
बैठी हूँ.


इतना सुनते ही, सहमी सी थोड़ी
दबी जुबान से बेटी ने कहा-
मां, यहां कैसे-कैसे लोग हैं ?
जो माँ को माँ, बेटी को बेटी
बहन को बहन
कहना भी भूल गए


मानवता को तार-तार कर
इंसान से हैवान बनते
ये कैसे आदमखोर लोग हैं
अब तो एक अकेली,
बाहर निकलने से भी
डर लगता है


इतना सुनते ही,
मां की आँखें नम हो गई.....


-थानू निषाद "अकेला"
टिकरापारा, फिंगेश्वर (छ.ग.)

Monday, September 8, 2014

हिलती हैं दीवारें...............डॉ. दीनदयाल दिल्लीवार
















रोज,
हर रोज ही
हिलती हैं
दीवारें
मेरे घर की
मारा जाता है
अनजानें ही
जब कोई-
आदमी
तो कांपता है
नक्शा
हिन्दुस्तान का

डॉ. दीनदयाल दिल्लीवार,
बालोद, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़
.........अवकाश, नवभारत