मन खट्टा हो गया
चल यार
कैसी बात करता है
मन कभी मीठा हुआ
कभी सुना क्या?
नहीं न
यूँ ही जमी रहेगी दही
रिश्तों की
खटास रहेगी ही
चाहे जितना डालो चीनी
फिर मन खट्टा
हुआ तो हुआ
क्या करें?????
-राजेश”ललित”शर्मा
समय ज़रा सरक
बैठने दे मुझे
अपने साथ
गुज़ारने दे चंद पल
कुछ करें बात
चलें कुछ क़दम
समझें हम तुम्हें
तुम हमें समझो
सच में बहुत
तेज़ चलते हो
रुको तो
सुनो तो
फिर निकल गये आगे
चलो मैं ही दम भरता हूँ
ज़िंदगी ही से सवाल करता हूँ
जवाब जब मिलेगा
सो मिलेगा।
-राजेश”ललित”शर्मा